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संपादकीय

नर्मदा नियंत्रण मण्डल

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में निमाड़ अंचल के लिए 57 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की योजनाओं को मंजूरी दी गई। यह दोनों योजनाएं पूर्व और पश्चिम निमाड़ के उस अंचल तक नर्मदा का जल ले जायेंगी जो इस क्षेत्र की महत्वाकांक्षी इंदिरा सागर परियोजना की सिंचाई से अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण वंचित है। बैठक में बताया गया कि सिंचाई से वंचित क्षेत्रों में नर्मदा का जल पहुंचाने के लिये हर संभव प्रयास किये जाएं। 'पर-ड्राप मोर-ड्राप' के लिये नर्मदा जल की बूँद-बूँद का उपयोग किया जायेगा। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजनाओं की नहरों की सिंचाई से वंचित क्षेत्रों में नर्मदा जल ले जाने की योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए। बैठक में खंडवा जिले की पंधाना तहसील की 58 गांवों की 35 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करने की छैगांवमाखन उद्वहन सिंचाई योजना स्वीकृत की गई है। इसके साथ ही खरगौन जिले में गोगावां, भगवानपुरा और खरगौन तहसील के विष्टान अंचल में 22 हजार हेक्टेयर रकबे को सिंचित करने की विष्टान उद्वहन सिंचाई योजना भी स्वीकृत की गई। इन दोनों परियोजनाओं में किसानों को स्प्रिंकलर तथा ड्रिप पद्धति से सिंचाई के लिए जल सुलभ होगा। इससे सिंचाई के लिये खेतों में कमांड एरिया विकास के कार्य नहीं करने होंगे, जो नहर सिंचाई के लिए आवश्यक होते हैं। दोनों योजना के लिए जल की आवश्यक मात्रा का उद्वहन इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहर से किया जायेगा। जल उद्वहन के लिये सौर ऊर्जा का उत्पदान किया जायेगा। सौर प्रणाली उत्पादित ऊर्जा, ऊर्जा विभाग की ग्रिड में फीड कर बदले में ग्रिड से आवश्यक बिजली ली जायेगी। इस प्रकार दोनों योजनाएं बिजली खपत की दृष्टि से आत्मनिर्भर होंगी। स्प्रिंकलर और ड्रिप से सिंचाई की व्यवस्था होने से दोनों परियोजना की लागत में भी करीब 285 करोड़ रुपये की बचत भी होगी। नर्मदा नियंत्रण मंडल के जरिए मध्यप्रदेश सरकार किसानों के हित में अनेक निर्णय लेती है। उपरोक्त दोनों योजनाओं के पूरा होने से पूर्व और पश्चिम निमाड़ के इलाकों का पर्याप्त विकास हो सकेगा।

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उज्जैन बनेगा धार्मिक पर्यटन का केन्द्र - मुख्यमंत्री

उज्जैन शहर को बड़ी मेहनत से सजाया, संवारा और बनाया है। उज्जैन का यह स्वरूप हमेशा बना रहे, कभी न बिगड़े। उज्जैन धार्मिक पर्यटन का केन्द्र बने और देश-दुनिया के लोगों को यह लगे कि उज्जैन की यात्रा यदि नहीं की तो उनकी यात्रा सफल नहीं होगी। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 29 मई को उज्जैन में क्षिप्रा तट रामघाट पर सिंहस्थ की सफलता में योगदान के लिये उज्जैनवासियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और समाज के सभी वर्गों, अधिकारी-कर्मचारियों, स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए कही।

मुख्यमंत्री ने कहा धर्म के प्रति आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा सिंहस्थ में देखने को मिला। सारे रिकार्ड टूट गये। बाबा महाकाल की उज्जैन नगरी अद्भुत नगरी है। मैं उज्जैन की जनता का भक्त हो गया हूँ। सिंहस्थ में उज्जैन की जनता के दरवाजों के साथ ही दिल के दरवाजे भी खोलकर श्रद्धालुओं की सेवा की है। बेटी की शादी की तरह लोगों ने सिंहस्थ के सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ की सफलता का श्रेय बाबा महाकाल की कृपा, सन्तों के आशीर्वाद और उज्जैन की जनता के पुण्यों का ही प्रतिफल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैनवासी यहाँ की सड़कें, पुल-पुलिया, मन्दिर और क्षिप्रा के घाट और जल को संजोकर रखें। ओजोनाइजेशन का प्लांट, फव्वारे और लाईटिंग की व्यवस्था भी निरन्तर जारी रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीवेज का पानी क्षिप्रा में मिलने नहीं दिया जायेगा। इसके लिये 232 करोड़ रुपये की राशि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिये स्वीकृत की गई है। दोनों तटों पर फलदार पौधे लगाये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने उपस्थितजनों को उज्जैन को स्वच्छ रखने, सुन्दर रखने, पेड़ लगाने और उज्जैन शहर को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दिलाया।

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सामाजिक दायित्व और सरोकार से बच्चों का पोषण

ऊर्जा एवं जनसम्पर्क मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि सामाजिक दायित्व और सरोकार में बच्चों का पोषण और उनका स्वास्थ्य महत्वपूर्ण मुद्दा है। जिले को कुपोषण मुक्त बनाने में कोई भी व्यक्ति स्नेहपूर्वक पोषण की जिम्मेदारी निभाकर बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति अपना योगदान दे सकता है। सतना जिले के प्रभारी मंत्री श्री शुक्ल 29 मई को सतना में 'ग्राम उदय से भारत उदय' अभियान में स्नेह सरोकार सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने बच्चों को कुपोषण की परिधि से बाहर लाने वाले व्यक्तियों को सम्मानित भी किया।

प्रभारी मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि यह गर्व की बात है कि सतना जिले के कम वजन वाले सभी कुपोषित 3152 बच्चों को 2800 लोगों ने गोद लेकर कुपोषण से मुक्ति दिलवाने का संकल्प लिया है। प्रभारी मंत्री ने सहायक प्राध्यापक कांती राजोरिया को 7 बेटियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी लेने के लिये सम्मानित किया। ऊर्जा मंत्री ने एक कार्यक्रम में उजाला योजना में एलईडी बल्ब का वितरण किया। प्रभारी मंत्री ने 'ग्राम उदय से भारत उदय' अभियान की गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने गतिविधियों की जानकारी पंचायत दर्पण पोर्टल में अपलोड किये जाने के निर्देश भी दिये।

श्री शुक्ल ने मझगवाँ-चित्रकूट फोर-लेन और सतना-बेला फोर-लेन मार्ग निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बरसात के पहले अर्थ-वर्क वाले सभी कार्य हर हाल में पूरी किये जायें। सड़क निर्माण की धीमी प्रगति पर प्रभारी मंत्री ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने निर्माण एजेंसी को हिदायत दी कि सतना-बेला मार्ग बरसात के समय चलने योग्य रहे, इसके लिये पूरे इंतजाम किये जायें।

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सिंहस्थ के लिये भूमि देने वाले किसानों का सम्मान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंहस्थ के लिये अपनी जमीन उपलब्ध करवाने वाले किसानों का 29 मई को उज्जैन में सम्मान किया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ के सफल आयोजन में किसानों की भूमिका सबसे अहम रही है।

चौहान ने कहा कि किसानों ने सिंहस्थ के लिये भूमि उपलब्ध करवाकर पुण्य का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि उनकी यह पहल सम्मान योग्य है। श्री चौहान ने किसानों से कहा कि भूमि जिस रूप में उनसे ली गयी थी, उसी रूप में उन्हें लौटायी जायेगी। मुख्यमंत्री में भी योगदान दिया और ट्रेक्टर पर बैठकर सुधार कार्य में शामिल हुए। उन्होंने कृषक श्री चंदू यादव, श्री राजाराम माली, शारदा सचदेव, माधुरी रमनानी आदि किसानों का साफा-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। श्री चौहान ने माँ हरसिद्धि के दरबार में पहुँचकर सपत्नीक पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारसचन्द जैन, सांसद डॉ. चिंतामणि मालवीय, डॉ. सत्यनारायण जटिया, विधायक डॉ. मोहन यादव एवं श्री सतीश मालवीय उपस्थित थे।

 

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